Thursday, June 5, 2014

दिल्ली की सुरक्षा राम भरोसे

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी।दिल्ली में लगातार बढ़ती वारदातो को देखकर भी प्रशासन राजधानी में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगा पा रहा है।जिसके कारण राजधानी में निगरानी तंत्र के उपायों पर भी सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली के मुख्य बाजार तथा सीमाओं पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों का प्रस्ताव कई सालों से लंबित है। कई साल पहले राष्ट्रमंडल खेलों से पूर्व राजधानी में  सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम दिल्ली प्रशासन ने शुरु किया था, लेकिन तब से लेकर अब तक इन चार सालों में  नाम मात्र के ही सीसीटीवी कैमरे दिल्ली में लग पाये ।जिन क्षेत्रों में ये में कैमरे लगे हैं, वहां भी इनकी स्थिती खस्ताहाल हैं। अगर दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे सही तरह से काम करने लगे तो तो अपराधिक घटनाओं पर भी लगाम लगायी जा सकेगी ।राजधानी के  भीड़भाड़ वाले बाजारों समेत अन्य स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों और व्यक्तियों पर नजर रखने की इससे बेहतर व्यवस्था फिलहाल दूसरी नहीं है।
                 दिल्ली की ऐतिहासिक और भीड़भाड़ से भरे रहने वाले चांदनी चौक में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या काफी कम है। जो कैमरे लगे भी है उनमें नाइट विजन नहीं है। करीब दस साल पहले लगाए गए कैमरों में रात के समय होने वाली गतिविधियां रिकार्ड नहीं हो पाती।कपड़ो के व्यापार के लिये प्रसिध्द  सरोजनी नगर मार्केट बम धमाकों का गवाह रह चुका है। इस बाजार में भी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या काफी कम हैं, जिनकी संख्या यहां के भीड़भाड़ के लिहाज से काफी नहीं है। इस बाजार में प्रशासन ने पुलिस को  तैनात किया  है लेकिन बाजार में प्रवेश वाले किसी भी गेट पर मेटल डिटेक्टर नहीं हैं।बड़े थोक बाजार सदर बाजार में भी करीब एक दर्जन सीसीटीवी कैमरे हैं। लेकिन 15 हजार दुकान वाले इस बाजार में आने वाले लोगों की संख्या लाखों में है। इस लिहाज से कैमरों की संख्या काफी नहीं है।मध्य दिल्ली का पहाड़गंज बाजार भी 2005 में आतंक का शिकार बन चुका है। 2007 में यहां 26 से ज्यादा कैमरे लगाए गए थे। लेकिन आलम यह है कि दो साल से अधिकतर सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। इसके बावजूद उन्हें ठीक नहीं कराया जा सका है।


अनधिकृत कालोनी की भेट चढ़ी कृषि योग्य भूमि

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। देश की राजधानी दिल्ली में हमेशा पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण बचाव तथा पर्यावरण से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर अकसर चर्चा होती है,लेकिन यह चर्चा केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह जाती है। एक समय था जब दिल्ली के खेतो में जहां पहले कभी फसलें लहलहाती थीं वहीं, अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद खेत काफी सिमट गये हैं। दिल्ली शहर में आबादी के साथ मकान भी बढ़ रहे हैं, लेकिन कृषि योग्य भूमि खत्म होती जा रही है।
                       सरकारी एजेंसियों लोगों को आवास मुहैया कराने  में नाकाम साबित हो रही है।जिसके कारण अवैध शहरीकरण दिल्ली में कृषि योग्य भूमि को खत्म करता जा रहा है।राजधानी से लगातार कृषि योग्य भूमि खत्म हो रही है। अनधिकृत कालोनियों को रोकने के सरकार के हर प्रयास अब तक नाकाम साबित हो रहे है। अगर इसी हिसाब से दिल्ली में यह सिलसिला चलता रहा तो कुछ ही सालों में खेत और हरियाली इतिहास के पन्नें बन जायेगें। दिल्ली सरकार के आंकड़ों को देखा जाये तो कृषि योग्य भूमी गैर कृषि कार्यो के कारण लगातार  खत्म हो रही है।
              दिल्ली में आवासीय कॉलोनियों के निर्माण, विकास कार्यो सहित अन्य कामो के लिये सरकार ने किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन सरकार ने जितनी जमीन किसानो से ली, ज्यादा जमीन अनधिकृत कॉलोनियों का कब्जा हो गया।दिल्ली में ये अवैध कालोनियां लगातार बढ़ रही है।

                              मालूम हो शीला सरकार ने दिल्ली की 895 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करते हुए घोषणा की थी कि राजधानी में अब और अनधिकृत कॉलोनियों के निर्माण की इजाजत नहीं दी जाएगी,लेकिन अफसरो के ढुलमुल रवैये के कारण अनधिकृत कॉलोनियां रुकने का नाम नहीं ले रही है। अगर ऐसा ही चलता रहा ते वह दिन दुरल नहीं जब दिल्ली में खेत केवल इतिहास बन जायेगें।

अबकारी विभाग ने चलाया अभियान,अवैध शराब का जखीरा बरामद

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। दिल्ली के उपराज्यपाल, नजीब जंग, के निर्देशानुसार दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने अवैध शराब की आपूर्ति और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए ब्रहद छापेमारी अभियान आयोजित किया। आबकारी आयुक्त द्वारा वरिष्ठ  अधिकारियों के नेतृत्व में गठित अनेक दलों को शराब की आपूर्ति, गुणवत्ता, मात्रा और ब्रांड की जांच के लिए राजधानी के  विभिन्न क्षेत्रों में भेजा गया था ।

 अभियान की जानकारी देते हुए दिल्ली के आबकारी आयुक्त, जेबी सिंह ने बताया कि शराब की गुणवत्ता, मात्रा और शराब के ब्रांड और बरामद की गई अवैध शराब में संलिप्त लोगों के खिलाफ आबकारी कानून के अंतर्गत कई मामले दर्ज किए गए, अवैध शराब के ब्रांडो का जखीरा बरामद किया गया, और शराब की अवैध आपूर्ति में प्रयुक्त वाहनों को भी जब्त किया गया।
 दिल्ली के बुराड़ी थाने में भगवान दत्त के पास से अवैध शराब की 240 बेस्टो ब्रांड और 360 बोतलें मुरथल ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त महिंद्रा जाइलो कार को भी जब्त कर लिया गया।बाराखम्भा रोड थाने से जुगल किशोर से अवैध शराब की 240 पार्टी स्पेशल और 240 बोतलें संतरा ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त चैम्पियन गाड़ी भी जब्त कर लिया गया।

 पांडव नगर थाने में सतीश कुमार यादव से अवैध शराब की 360 बोतले रसीला संतरा और 60 बोतलें बैगपाइपर और 60 बोतलें मैक्डोवल ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त होंडा सिटी गाड़ी भी जब्त कर लिया गया। भलस्पा डेयरी थाने में विकास ले अवैध शराब की 660 बोतलें और 552 बोतलें रसीला संतरा ब्रांड की हरियाणा में ब्रिकी के लिए की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त टाटा मैजिक को भी जब्त कर लिया गया।वसंत कुंज थाने में रविन्दर से अवैध शराब की 360 बोतले किन्नू ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त मारूती स्टीम भी जब्त कर लिया गया। गीता काॅलनी थाने में राॅविन से अवैध शराब की 3768 बोतलें इम्पैक्ट और एपीसोड ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त ट्रक जब्त कर लिया गया। अलीपुर थाने में दिपल भंडारी अवैध शराब की 600 बोतलें असली संतरा और 576 बोतलें बेस्टो ब्रांड की बरामद की गई। अपराध में प्रयुक्त टाटा मैक्सिमो भी जब्त कर लिया गया।

तेजी से बढ़ रहे है अवैध मोबाइल टावर,प्रशासन नहीं कर रहा कार्यवाही

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी।दिल्ली में अवैध मोबाइल टावरों को कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनी लोगों को मोबाइल टावर लगाने के एवज में मोटी रकम देती है। अवैध रुप से लगने वाले इन मोबाइल टावरों के कारण पर्यावरण को लगातार क्षति पहुंच रही है।दिल्ली में लगने वाले कई मोबाइल टावर निजी अस्पतालों,रिहायशी इलाकों और स्कूलों की छतों पर लगे है। नगर निगम ने इन्हें स्वीकृति प्रदान नहीं की है।
                             नगर निगम ने वर्ष 2010 में जो पालिसी  लागू की थी उसके हिसाब से नर्सिंग होम, शिक्षा संस्थानों, सरकारी और निजी अस्पतालों पर मोबाइल टावर नहीं लगाए जा सकते हैं, लेकिन राजधानी में बड़ी संख्या शिक्षा संस्थानों, सरकारी और निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम पर अवैध मोवाइल टावर लगे है।

                      इस सन्दर्भ में नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से लगे  मोबाइल टावर संचालकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।अवैध टावरो पर जल्दी ही सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी। नगर निगम द्रारा एक साल के अंदर अस्पतालों व स्कूलों के ऊपर लगे 209 मोबाइल टावरों को सील किया गया है।नगर निगम आगे भी अवैध मोबाइल टावरों पर कार्रवाई जारी रखेगा।

नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है, भूमिगत पैदल पार पथ

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी।दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनाट पैलेस के चारो ओर सरकार ने लोगों की सुविधा के लिये भूमिगत पैदल पार पथ (सब-वे) तो बनवा रखे है,लेकिन अधिकतर पैदल सड़क पार करते लोग सब-वे का इस्तेमाल नहीं कर पाते। ऐसा इसलिए है कि इन भूमिगत
पैदल पार पथ की स्थिति ठीक नहीं है।इन सब-वे में न तो पर्याप्त लाइटों का प्रबंध है और न ही सुरक्षाकर्मी दिखते हैं।रात के समय जब तेज वाहन सड़को पर फर्राटा भरते है और यातायात पुलिस के कर्मचारी भी नजर नही आते है तो लोगों को मजबूरीवस इन सब-वे का सहारा लेना पड़ता है,लेकिन रात को इन सब-वे को पार करना लोंगों के लिये जोखीम भरा होता है ।जिसका कारण हैं शाम होते ही सब-वे पर नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का कब्जा हो जाता है।ये नशेड़ियों और असामाजिक तत्व  सब-वे में गंदगी फैलाते हैं।लोगों को हमेशा डर लगा रहता है कि किसी दिन कोई वारदात न हो जाये। सब-वे की सुरक्षा को लेकर इस्से संबंधित विभागों का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं है।
                 इसके साथ ही दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में बने भूमिगत पैदल पार पथ की स्थिति भी ठीक नहीं है। न तो पर्याप्त लाइटों का प्रबंध है और न ही सुरक्षाकर्मी दिखते हैं।आजादपुर मंडी स्थित सब- वे में न तो रोशनी का उचित प्रबंध है और न ही सुरक्षाकर्मी। इस सब वे के गेट की रेलिंग टूटी गयी है। इमरजेंसी लाइटें भी कई माह से खराब पड़ी हैं। अंदर की एकमात्र हल्की टयूब जलती दिखाई देती है।बाहरी रिंग रोड पर पावर हाउस के पास स्थित सब-वे की स्थिति भी खराब है। रात तो दूर,यहां दिन में भी अंधेरा बना रहता है। इसके चलते लोग सब-वे का इस्तेमाल नहीं करते। जबकि पास ही रोहिणी कोर्ट, ज्ञान-विज्ञान प्रयोगशाला समेत कई महत्वपूर्ण दफ्तर है। बावजूद इसके रखरखाव पर ध्यान प्रशासन का ध्यान नहीं है।कमोबेस सरस्वती विहार स्थित बने सब-वे की स्थिति भी ठीक नहीं है। असामाजिक तत्वों की ओर से फैलाई गंदगी से लोग इधर से गुजरने से कतराते हैं। अगर कोई निकल भी जाए तो उसे नाक पर रूमाल रखनी पड़ती है।

Tuesday, June 3, 2014

सुविधओं से महरुम खिचड़ी पुर के लोग

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। खिचड़ीपुर के लोग अपनी मूल-भूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।इलाके के नागरिक दूषित जलापूर्ति ,लचर सफाई व्यवस्था सहित बदहाल पार्को की समस्या से दुखी हैं।इस इलाके में लचर सफाई व्यवस्था के साथ सड़को पर अतिक्रमण और कूड़े के ढेर से स्थायी नागरिंकों का जीना मुहाल हो गया है। सम्बंधित विभाग से शिकायतों और आवेदनों के बाद भी क्षेत्र में डिस्पेंसरी, समुदाय भवन और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों को नसीब नहीं हो पा  रही हैं। इस इलाके के पास स्थित कालोनियों में विकास नजर आता है, लेकिन खिचड़ीपुर के नागरिक अब भी अपनी मूल-भूत सुविधाओं के इंतजार में प्रशासन की ओर देख रहे हैं। खिचड़ीपुर क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में यहां की लचर सफाई व्यवस्थाऔर दूषित जल आपूर्ती है।इस क्षेत्र की मुख्य मार्ग हो या गलियां, नालियों में कूड़े का ढेर होता है। महीनों तक सफाई न होने से नालियों का पानी लोगों के घरों के अंदर भी आने लगता है । खिचड़ीपुर में लोगों के लिये एक ही पार्क है जो  असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। यहां आए दिन इस पार्क में नशेड़ियों और जुआरियों का जमघट लगा जगा रहता है, जो रोज़ नयी-नयी वारदातों को अंजाम देते है।स्थायी नागरिकों के लिये पार्क किसी प्रकार की कोई सुविधा नही है। मुख्य मार्ग पर सब्जी और फलों की दुकानों के कारण अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है।

चोरी,हत्या और डकैती के आरोपी पुलिस गिरफ्त में

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दिल्ली में अपराधो को देकते हुये ,कई अपराधिक वारदातो में लिप्त विभिन्न गिरोहों के सदस्यो को गिरफ्तार किया है।

                         जानकारी के मुताबिक दिल्ली में चोरी ,हत्या ,डकैती और अन्य अपराधो को देखते हुये दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने कई टीमों का गठन किया ।ये टीमें विभिन्न स्थानों से अपराधियों की जानकारी को एकत्र करना शुरु किया।इंस्पेक्टर आनंद सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने  करवाल  से  एक झपटमार हेमवीर को गिरफ्तार किया । पुलिस ने उसके पास एक मोबाइल फोन बरामद किया। जो करवाल  नगर के क्षेत्र से लूटा गया था।दूसरे अपराधी परवीन उर्फ राहुल को पुलिस ने सराय रोहिल्ला से 2 चोरी के मोबाइल फोन के साथ गिरफ्तार किया है ।तीसरे अपराधी को इंसपेक्टर आजाद सिंह और क्राइम ब्रांच की   टीम ने  विशिष्ट सूचना के आधार पर कल्याणपुरी से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभयुक्त जगतार उर्फ लाली हत्या के मामले फरार चल रहा था।


                 इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियारों को रोकने के प्रयासों में अवैध हथियारों के बिक्री में शामिल एक गिरोह के तीन सदस्यो का भी भंडाफोड़ किया है। विशिष्ट सूचना के आधार पर अपराध शाखा के अधिकारियों की एक टीम ने प्रेम पाल सिंह ,दिलीप सिसोदिया और विनोद को अवैध हथियारो की एक खेप के साथ गिरफ्तार किया है।इसके साथ ही पुलिस ने चोरी के सात वाहनो के साथ फरमान,अशोक,सुभान अली और मो. वसीम को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली की सड़को पर नहीं दौड़ पायी चीन की बसे

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। मोबाइल से लेकर घड़ी तक और बिजली के मीटरों से लेकर अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक की आपूर्ति करने वाले पड़ोसी चीन से दिल्ली सरकार बसे खरीदने की योजना बनायी थी। चीन से बसों के खरीदने का कारण था ,सड़कों पर बसों की भारी कमी और भारतीय कंपनियों से इनकी खरीद को लेकर बात नहीं बन पाने से परेशान दिल्ली की सरकार पड़ोसी देश चीन से बसों को खरीद कर  दिल्ली के सड़को पर दौड़ाने वाली थी। इस समय दिल्ली की सड़को पर डीटीसी की लगभग 5 हजार बसे यात्रियो को सफर करा रही है, जबकि यात्रियों की सहुलियत के लिये 11 हजार बसों तक पहुंचने का लक्ष्य सरकार ने बनाया था।नयी बसे खरिदने के लिये वित्त विभाग ने नयी बसों की खरीद के लिए दिल्ली परिवहन निगम को जरूरी राशि भी प्रदान कर दी थी , लेकिन बसें नहीं खरीदी जा सकीं।
                        इस सन्दर्भ में आधिकारिय़ों का कहना है कि  पहले से ही टाटा और अशोक लीलैंड कंपनियों की बसें अभी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही हैं। इन बसों को जब खरीदा गया  था तो इनके वार्षिक रखरखाव  की जिम्मेदारी भी इन्हीं कंपनियों को दे दी गयी थी। उस समय सरकार और इन कंपनियों के बीच करीब ढाई रुपये प्रति किलोमीटर की दर से रखरखाव का समझौता किया गया था। हुआ यह है कि इन बसों में लगातार आ रही तकनिकी खराबी के कारण निजी कंपनियों को ढाई रुपये प्रति किलोमीटर की दर से इनके रखरखाव का सौदा बेहद महंगा लगने लगा है। इसीलिए जब सरकार की ओर से बसों की नई खेप खरीदने की कवायद शुरू हुई तो इन कंपनियों ने रखरखाव के मद में करीब 80 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय करने का प्रस्ताव रखा। चूंकि ढाई रुपये और 80 रुपये प्रति किलोमीटर में कोई तुलना तक नहीं की जा सकती । इसी क्रम में भारतीय कंपनियों के अलावा चीन की कंपनियों द्वारा मांगी जा ही कीमतों का आकलन भी किया जा रहा था।जिसका खर्च भारतीय बसों की अपेक्षा काफी कम पड़ रहा था। लिहाजा डीटीसी के खेमें में चीन की बसे भी शामिल करने की योजना बनायी गयी थी।


रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता ने बचायी मासूम की जिन्दगी

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। आनंद विहार टर्मिनल में सी सी टी वी कंट्रोल रुम में तैनात रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों ने प्लेटफार्म नम्बर दो और तीन पर एक व्यक्ति की संदेहास्पक गतिविधि देखी।उस समय संजय पोद्दार नाम का यात्री अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ प्लेटफार्म पर सो रहा था।उसी
दौरान एक व्यक्ति ने सोए हुये बच्चों में से छ: माह के आयुष को उठा कर चला गया और सबवे के पास बैठ गया।इस दौरान अधिकतर यात्री सो रहे थे,लेकिन रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारी सीसीटीवी कंट्रोल रुम से इस अपराधिक गतिविधि को देख रहे थे।
                           रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारियों ने तत्काल प्लेटफार्म पर तैनात कर्मचारियों को वायरलेस पर संदेश दिया।संदेश प्राप्त करते ही प्लेटफार्म पर तैनात कर्मचारी हरकत में आये और तुरंत सब वे की तरफ जा कर बच्चे को अपहरणकर्ता से बच्चे को मुक्त कराये। रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारियों ने अपहरणकर्ता को गिरफ्तार करके आगे की कार्यवाही के लिये राजकीय रेलवे पुलिस को सौप दिया। अपहरणकर्ता की पहंचान कानपुर,उत्तर प्रदेश के रहने वाले चन्द्र शेखर के रुप में हुई है। रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारियों ने अगवा बच्चे को उसके मांता-पिता को सौंप दिया।

                                 ड्यूटी पर उपस्थित रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारियों की सतर्कता के कारण एक मासूम बच्चे के अपहरण को टाला जा सका।

डी,यू में मिशन एडमिशन शुरु

                    नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। दिल्ली विश्वविद्यालय  में चार साल के ग्रेजुएशन कार्यक्रम के तहत 54 हजार सीटों के लिए दाखिले की प्रक्रिया सोमवार को फॉर्म की बिक्री के साथ शुरू हो गयी। विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में प्रवेश के लिये छात्र 16 जून तक ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से ओएमआर फॉर्म भर सकते हैं।
ऑनलाइन ओएमआर फॉर्म दिल्ली विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा जबकि ऑफलाइन फॉर्म भरने के लिए नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस और विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों में 18 केंद्र बनाए गए हैं। ऑफलाइन फॉर्म का शुल्क सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए 150 रुपए और अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों के लिए 70 रुपए है।
                          ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिहाज से इनका शुल्क कम रखा गया है ।इसमें इंटरनेट बैंकिंग के जरिये सामान्य श्रेणी के छात्रों को 100 रुपए जबकि अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों को महज 50 रुपए देने होंगे. यूनिवर्सिटी ने दाखिला संबंधी जानकारी प्राप्त करने और फॉर्म भरने के लिए विश्वविद्यालय एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन एप्लीकेशन डीयू यूपी एडमिशन भी जारी किया है।
                             विश्वविद्यालय  की पहली कटऑफ लिस्ट 24 जून को जारी होगी और उसके बाद सीटों की उपलब्धता के आधार पर 21 जुलाई तक 9 और लिस्ट जारी होंगी। पहली पांच कट ऑफ सूची के दौरान छात्रों को दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए महज तीन दिन का समय दिया जाएगा। 

समय पर कूड़ा और गाद का न उठना लोंगों के लिये बना सिरदर्द

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। दिल्ली के कई क्षेत्रों में इन दिनो कूड़ा और गाद न उठने की समस्या से लोग परेशान है।यह समस्या केवल अनधिकृत कालोंनियों में ही नहीं बल्की दिल्ली के पॉश इलाकों में भी है। सड़कों और फुटपाथ पर लगे कूड़े के अंबार के वजह से लोगों का से गुजरना मुश्किल होता जा रहा  है।इन कूड़े के अंबार के कारण कई प्रकार की बिमारिया फैल रही है, जिसके कारण से काफी लोग बीमार भी हुए हैं।
                                 कल्याणपुरी,त्रिलोकपुरी,खिचड़ी पुर,ईस्ट विनोद नगर,वेस्ट विनोद नगर,न्यू अशोक नगर,विकासपुरी,गनेश नगर,मयूर विहार फेज-3,न्यू कोण्डली और मंडावली सहित
राजधानी के कई ऐसे इलाके ङैं जहां यह समस्या दिनो –दिन बढ़ती जा रही है।इन क्षेत्रों में समय पर कूड़ा नहीं उठता इसके साथ ही नालियों से निकली गाद भी समय पर नहीं उठती।इन इलोकों में जगह – जगह सफाई कर्मियों ने नालियों की गाद  निकालकर फुटपाथ  पर रखी दी है।  
इन्हीं में से में से एक क्षेत्र है त्रिलोकपुरी जहां के लोगों को कूड़े और गाद की समस्या के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।स्थायी नागरिंको का कहना है कि यह समस्या इस क्षेत्र में काफी समय से बरकरार है,दिनों –दिन यह स्थिती बद से बदतर हो जा रही है। वहीं कूड़े के ढेर के पास में एक नाला भी है, जिसकी दुर्गध के कारण आसपास के लोगों का रहना दूभर है। यहां काम करने वाले सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आते। यदि आते भी हैं तो कूड़े को नाले में डाल देते हैं और नाले से निकाली गाद को सड़क के फुटपाथ पर छोड़ कर चले जाते है।  स्थीनिय निवासियों के अनुसार उन्होंने इस संदर्भ में कई बार नगर निगम को सूचित किया है, लेकिन इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। कूड़ा और गाद के रास्ते में पड़े होने के कारण पढ़ने वाले काफी बच्चों को भी 

मनोचिकित्सकों को उम्मीद, आयेंगे‘अच्छे दिन’

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। भारत की एक बड़ी आबादी को मानसिक चिकित्सा सुविधायें नहीं मिलने पर पर चिंता जताते हुये मनोचिकित्सकों ने नरेन्द्र मोदी सरकार से देश के लोगों को उत्कृश्ट दर्जे की मानसिक चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये तत्काल कदम उठाने तथा देश में समग्र मानसिक चिकित्सा को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाये जाने की मांग की है।
                   मनोचिकित्सा पर सम्पन्न हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन फ्रंटियर्स साइकाग  में भाग लेने वाले मनोचिकित्सकों ने देश के कस्बों, छोटे शहरों और गांवों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की कमी पर अपनी चिंता जाहिर की।
                      फ्रंटियर्स साइकाग  के आयोजक सचिव डॉ. सुनील मित्तल ने कहा कि  भारत में उत्कृश्ट दर्जे की मानसिक देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराना एक चुनौती है क्योंकि यहां मानसिक रोगों के इलाज और मानसिक रोगियों की देखभाल के लिए15 से 20 करोड़ रोगियों के लिए मात्र 4 हजार मनोचिकित्सक ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा,करीब 70 प्रतिशत मनोचिकित्सक निजी क्षेत्र में हैं और सिर्फ एक तिहाई मनोचिकित्सक ही सरकारी क्षेत्र में हैं। मानसिक रोगियों के बेहतर इलाज के लिए सिर्फ मनोचिकित्सकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की कमी ही मुद्दा नहीं है, बल्कि देश में एक व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का भी अभाव है। हमें उम्मीद है कि नई सरकार इन मामलों पर तुरंत गौर करेगी और उसके अनुसार कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि देश भर के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे दिन आने की उम्मीद है और हम मनोचिकित्सकों को भी उम्मीद है कि अन्य क्षेत्रों की तरह मानसिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी ,अच्छे दिन  आयेंगे। भारत और विदेशों आये 3सौ से अधिक प्रमुख मनोचिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने फ्रंटियर्स साइकाग सम्मेलन में भाग लिया । इस कार्यक्रम का  उद्घाटन पीजीआई, चंडीगढ के निदेशक प्रो. जे. एस. नेकी ने किया।  

Monday, June 2, 2014

खटारा बसों के सहारे दिल्ली देहात के यात्री



नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। दिल्ली देहात में चलने वाली परिवहन निगम की बसो कि स्थिती पूरी तरह से चरमराई हुई है। बसों के इन्तेजार में आज भी कई गावों के लोगों  को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता। दिल्ली देहात के सैकड़ों गांवों में आज भी बसों का अकाल पड़ा है। इन गांवों में दिल्ली परिवहन निगम की पुरानी बसें चल रही हैं, मगर इनकी हालत ऐसी हैं कि ये बीच राह में दम तोड़ रही है। ऐसे में इन बसों में सफर कर रहे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

           पश्चिमी दिल्ली के सैकड़ों ऐसे गांव हैं
जहां पर पहले तो बसों की भारी किल्लत है। जिन गांवों में कुछ बसें चल भी रही हैं। मगर इन बसों में सफर कर रहे यात्रियों को आराम के बजाय परेशानी अधिक झेलनी पड़ रही है। पश्चिमी दिल्ली के तीन ऐसे डिपो हैं जहां पुरानी बसों को गांव देहात के लिए चलाया जा रहा है। ये डिपो हैं हरि नगर, घुम्मन हेड़ा और ढिचाऊ कलां। इनमें सौ से अधिक बसें गांवों में चल रही है। इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों को गर्मी में झेलनी पड़ रही दोहरी मार झेलनी पड़ती है यात्रियों का कहना है कि एक तो ये बसें कहीं पर भी खराब हो जाती है। दूसरा उन्हें दूसरी बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इन खटारा बसों में सफर कर पैसे के साथ ही समय भी अधिक लग रहा है।ढिचाऊं कलां गाव में डीटीसी को डिपो बनाने के लिए जमीन दी गई,मगर दुख की बात है कि गांव की 10 हजार जनसंख्या के बावजूद यहां बसों को भारी अकाल है। जो बसें है वे खस्ता हाल हैं। कहीं पर भी खराब हो जाती है। गांव में एक भी लो-फ्लोर बस की सेवा नहीं है। 

बिजली पानी की किल्लत ने लोगों की बढ़ाई मुश्किलें


नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। देश की राजधानी दिल्‍ली में शुक्रवार की शाम आई तेज आंधी-बारिश क्या आयी अपने साथ दिल्लीवासियों के लिये कई परेशानी भी लेकर आई। पिछले तीन दिनों से दिल्ली के कई इलाकों में बिजली  की आपूर्ती न होने कारण लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में दिल्लीवासियों पर दोहरी मार पड़ रही है, जिन इलाकों में पानी की समस्या विकराल हो गई है। पानी के लिए युद्ध स्तर की स्थीति बनी हुई है। गर्मी शुरू होते ही दक्षिणी दिल्ली के अधिकांश इलाकों में ऐसे दृश्य देखे जा सकते हैं। लोग पीने के लिए तो बोतलबंद पानी (20 लीटर) का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अन्य कामों के लिए उन्हें जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
                                    दिल्ली में शुक्रवार की शाम आई तेज आंधी-बारिश से कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।. पानी की सप्लाई पर भी इसका असर देखा गया । उमस भरी गर्मी के इस मौसम में जब पानी की खपत बढ़ जाती है ऐसे में अगर लोग बूंद-बूंद पानी को तरसें तो परेशानी समझी जा सकती है।दिल्ली के कई इलाके ऐसे हैं, जहां पानी मिलने पर लोगों को लगता है कि जैसे उन्होंने जैसे कोई जंग जीत ली हो।बाहरी दिल्ली के कई क्षेत्र ऐसे है जहां शुक्रवार की तेज-आंधी बारिश के बाद इलाके में न तो बिजली है, न पानी।जगह – जगह पेड़ो के टूटने के कारण, ट्रांसफार्मर के खराब होने के कारण पूर्ण रुप से बिजली की आपूर्ती ठप है ।लोगों का कहना है कि पानी कब आ जाए, इसका भी पता नहीं। लोग रात-रात भर जाग कर पानी का इंतजार कर रहे हैं।
                         दिल्ली जल बोर्ड सामान्य दिनों में 835 एमजीडी पानी की सप्लाई करता है लेकिन बिजली कटौती की वजह से पानी की सप्लाई 681 एमजीडी ही कर पा रहा है। कम आपूर्ती के कारण पानी का उत्पादन 154 एमजीडी कम हो गया है।जिसके कारण  लोग पानी की एक- एक बूंद के लिये तरस रहे है। । अगले दो से तीन दिनों तक बिजली-पानी का संकट बरकरार रह  सकता है।जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार बिजली कटौती के चलते वजीराबाद, चंद्रावल, सोनिया विहार, भागीरथी, हैदरपुर, नांगलोई, ओखला जल शोधन संयंत्रों में पानी का उत्पादन कम हो गया है। ग्रीन पार्क, मुनिरका, जेएनयू, आरके पुरम, मोती बाग, हौज खास, एनसीइआरटी कालोनी, महरौली, किशनगढ़ में पानी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। बिजली कटौती के कारण दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों में भी 25 से 30 फीसदी पानी का उत्पादन प्रभावित हुआ है।

नाइजीरियाई नागरिकों के कारण राजधानी में बढ़ रहा अपराध

नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। राजधानी में आये दिन नाइजीरियन नागरिकों द्रारा मादक पदार्थों की तस्करी और रोज नयी-नयी वारदाते सामने आ रही है।दिल्ली के जिन-जिन क्षेत्रों में ये नाइजीरियन नागरिक रहते है वहां के लोग दहशत में रहते है।पुलिस रिकार्ड में भी यह बाद सामने आयी है कि ड्रग्स,हिरोइन सहित अन्य मादक पदार्थों के व्यपार में ये नाइजीरियन नागरिक सबसे आगे है।ये नाइजीरियन नागरिक भारत में पर्यटन विजा लेकर आते है ,लेकिन ऐसे सौकड़ो मामले सामने आये है कि विजा की अवधी समाप्त होने के बाद भी ये अपने देश वापस नहीं लौटते है।
                छतरपुर एक्सटेंशन, साकेत,मालवीय नगर दिल्ली के कई इलाको के नागरिक नाइजीरियन नागरिकों की वजह से लोगों में दहशत व्याप्त है। छतरपुर एक्सटेंशन के लोगों का कहना है कि नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा लड़कियों व बच्चों को घूर कर देखने व उनकी अजीब हरकतों से सभी नागरिक परेशान हैं। ये लोग बच्चों को सॉफ्ट टारगेट समझकर उनसे छेड़छाड़ और दुष्कर्म करने की कोशिश करते हैं। हाल ही में पहले इसी इलाके में एक नाइजीरियन अपनी कार में एक बच्चे को खींचने की कोशिश कर रहा था। बच्चे के चिल्लाने पर जब लोग मौके पर पहुंचे तो वह भाग गया था। नाइजीरियाई युवक-युवतियां मादक पदार्थों का सेवन कर रात भर सड़कों पर घूमते रहते हैं। नशे में धुत नाइजीरियाई युवक महिलाओं से भी छेड़छाड़ करते हैं। मालवीय नगर  के लोंगो का कहना है कि हम लोगों ने कई बार इनके खिलाफ शिकायत की है, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई। ये लोग बच्चों पर बुरी नजर रखते हैं जिससे बच्चों में खौफ का माहौल है। बच्चे घर से बाहर निकलने में डरते हैं। हाल ही में गांधी विहार में लिव इन रिलेशन में रहा रहा एक नाइजीरियन भारतीय महिला के गहने व सामान लेकर फरार हो गया। छतरपुर एक्सटेंशन में में  11 वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ करना नाइजीरियाई युवक को काफी महंगा पड़ा। लोगों ने उसकी जमकर धुनाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। अर्जुन नगर इलाके में नशे में धुत नाइजीरियन ने रात एक बजे सरेआम युवती से अश्लील हरकत की। लोगों ने पिटाई के बाद उसे पुलिस हवाले कर दिया। एक नाइजीरियन नागरिक ने किराया मांगने पर लाजपत नगर में रिक्शा चालक की पिटाई कर दी। लोगों ने उसकी पिटाई कर पुलिस के हवाले कर दिया।स्थानीय नागरिकों की मांग है कि अगर पुलिस ने इन  नागरिकों पर उचित कार्रवाई नहीं की तो लोग प्रदर्शन करने को विवस हो जायेगे ।

मौसमी फलों की आवक बढ़ने से कीमत में आयी कमी



नई दिल्ली,आकाश द्विवेदी। उत्तर भारत से आम की आवक बढ़ने के कारण राजधानी की मंडियों में आम,खरबुज और तरबुज की थोक कीमत में गिरावट देखी जा रही है। पिछले चार से पांच दिनों के अंदर थोक कीमत में अधिकतम पांच से सात रुपये की कमी आई है। हांलाकि मंडियों में मौसमी फलों के दाम में कमी मई के दूसरे सप्ताह से ही प्रारंभ हो गई थी और उस समय आम का दाम 55 रुपये प्रति किलो तक रहा है आम मौजूदा समय में 25 रुपये तक बिक रहा है। यहां तक आमों के राजा अलफांसो की कीमत भी एक सप्ताह के अंदर प्रति किलो 75 रुपये से घटकर 55 रुपये तक रह गई है।इसके साथ ही खरबुज और तरबुजके दामों में भी गिरावट देखी गयी है खरबुज पहले 30 रुपये किलो बिक रहा था जो  जिसका दाम अब 15 से 18 रुपये के बीच है, तरबुज के दाम में भी गिरावट आयी है पहले यह 35  रुपये था अब 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
                     आजादपुर मंडी के के थोक कारोबारियों के अनुसार अप्रैल से ही मंडी में दक्षिण भारत के मौसमी फलों की आवक प्रारंभ हो गई थी, लेकिन आवक कम होने व मांग ज्यादा होने के कारण थोक में कीमत बढ़ी हुई थी। ऐसा आम तौर पर हर सीजन में होता है,लेकिन जैसे ही उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मलिहाबाद, सहारनपुर, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से मौसमी फलों की आवक बढ़ती है तो कीमत नीचे उतरने लगती है।
मंडी सूत्रों ने बताया कि रविवार को आजादपुर मंडी में आम की आवक 33 हजार ,खरबुज की आवक 40 हजार,तरबुज की आवक 35 हजार  क्विंटल दर्ज की गई। इसके अलावा 2626 क्विंटल कच्चे आम की भी आवक रही। इनमें 65 फीसद से अधिक आम की आवक उत्तर भारत से रही।
जबकि दो दिन पूर्व मंडी में करीब 3 हजार क्विंटल आम 5 हजार क्विंटल खरबुज, 8 हजार क्विंटल तरबुज की आवक रही थी। मंडी में मौजूदा समय में दशहरी, तोतापरी, सुर्खा आम की आवक हो रही है, जो अधिकतम 20 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। जबकि चार पांच दिन पूर्व तक इसकी कीमत अधिकतम 30 रुपये थी। खुदरा बाजार में भी आम अधिकतम 40 रुपये प्रति किलो के दर से मिल रहा है।वर्तमान में दक्षिण भारत से मौसमी फलों की आवक में कमी आई है,लेकिन उत्तर भारत से जैसे-जैसे मौसमी फलों की आवक बढे़गी, वैसे-वैसे कीमत में गिरावट आएगी। स्वाद में बेहतर होने के कारण उत्तर भारत के लोग मौसमी फलों को खूब पसंद करते हैं।






Sunday, June 1, 2014

सभी धर्मों के बीच सामंजस्य का अनूठा उदहारण बाबा खड़क सिंह मार्ग

 सभी धर्मों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिये सरकार और समाजिक संस्थाएं समय-समय पर कई तरह के समाजिक प्रयास करती हैं,लेकिन देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक रोड़ ऐसी भी है जो सभी धर्मो के बीच सामंजस्य का अनूठा उदाहरण पेश करती है। यह सड़क बिल्कुल दिल्ली के मध्य में स्थित है,लेकिन हैरानी की बात यह है कि दिल्ली के लोग ऐसी किसी जगह से बिल्कुल अंजान हैं।दिल्ली में धार्मिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण पेश करने वाली जगह का नाम है बाबा खड़क सिंह मार्ग।सह मार्ग वर्तमान में विभिन्न राज्यों के भवनो के लिये जाना जाता है।
                                 बाबा खड़क सिंह मार्ग के प्रारम्भ होते ही बाई और प्राचीन हनुमान मंदिर है।यह मंदिर 13 वीं शताब्दी से भी पुराना है।इस मंदिर के कनाट प्लेस में होने के वजह से यहां हमेशा श्रध्दालुओं का तांता लगा रहता है।श्रद्लुओं की यह भीड़ मंगलवार और शनिवार को कुछ ज्यादा ही रहती है।हनुमान मंदिर के साथ ही बाबा विश्वेश्वर नाथ शिव मंदिर है।यह मंदिर भी हनुमान मंदिर ही जितना पुराना है।
         दोनों मंदिरो से थोड़ा आगे चलने पर दाई ओर मस्जिद जामा है।इस मस्जिद के बारे में कहां जाता है कि यह मस्जिद मुगल काल की है।शुक्रवार को इस मस्जिद में भारी तादाद में नवाजी आते है।मस्जिद से आगे बढ़ने पर बाई ओर गुरुद्वारा बंगला साहिब है।यह गुरुद्वारा देश और दिल्ली के प्रमुख गुरुद्वारों में से एक है।रोजाना भारी संख्या में सभी धर्मों के लोग यहां आते है।
                                   गुरुद्वारा बंगला साहिब  से दाई ओर चलने पर  सेकरेड़ हट केथेड्रल चर्च है। यह चर्च दिल्ली के नामी-गिरामी चर्चों में से एक है।वैसे तो यहां ईसाई श्रध्दालु रोज़ ही आते है लेकिन रविवार के दिन यहां ईसाई श्रद्दालुओं की तादात बढ़ जाती है।
 बाबा खड़क सिंह मार्ग के दिल्ली के बीचों-बीच होने की वजह से विदेश से आने वाले लोग भी इन सभी दार्शनीक स्थलों पर भारी संख्या में आते है।